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भारतीय संविधान का इतिहास,बैकग्राउंड/पृष्ठभूमि को समझिए आसान भाषा में

भारतीय संविधान का इतिहास (बैकग्राउंड): एक विस्तृत यात्रा

भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। यह केवल कानूनों का संग्रह नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की आत्मा, लोकतंत्र, न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का प्रतीक है। इसका निर्माण एक लंबी और प्रेरणादायक प्रक्रिया का परिणाम है, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से शुरू होकर स्वतंत्रता संग्राम और संविधान सभा की गहन बहसों तक फैली हुई है। आइए इस इतिहास को क्रमवार और विस्तार से समझते हैं।

### औपनिवेशिक काल की नींव: कंपनी शासन (1773–1858)

भारतीय संवैधानिक विकास की शुरुआत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल से हुई। 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट पहला महत्वपूर्ण कदम था। इस अधिनियम के माध्यम से ब्रिटिश संसद ने कंपनी के मामलों में हस्तक्षेप शुरू किया। बंगाल के गवर्नर-जनरल का पद सृजित किया गया और कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई। 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट ने कंपनी पर ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण और मजबूत किया।

इसके बाद आए 1813, 1833 और 1853 के चार्टर एक्ट ने प्रशासन को केंद्रीकृत करने की दिशा में काम किया। 1833 के एक्ट ने गवर्नर-जनरल ऑफ बंगाल को भारत का गवर्नर-जनरल बना दिया और कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया। 1857 के विद्रोह के बाद 1858 का गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट पारित हुआ। इस अधिनियम ने कंपनी का शासन समाप्त कर भारत को सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन ला दिया। वायसराय का पद बनाया गया और भारत का शासन ब्रिटिश संसद के प्रत्यक्ष नियंत्रण में आ गया।

### ब्रिटिश क्राउन शासन और संवैधानिक सुधार (1858–1935)

इस काल में भारतीयों को सीमित भागीदारी दी जाने लगी। 1861 और 1892 के इंडियन काउंसिल्स एक्ट ने विधायी परिषदों में भारतीयों को शामिल किया, लेकिन वास्तविक शक्तियाँ बहुत कम थीं। 1909 के मॉर्ले-मिंटो सुधारों ने मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था की, जिसने सांप्रदायिक राजनीति की नींव रखी।

1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट) ने प्रांतों में द्वैध शासन (Dyarchy) लागू किया, जिसमें कुछ विषय भारतीय मंत्रियों को सौंपे गए। केंद्रीय स्तर पर द्विसदनीय विधायिका की व्यवस्था की गई। सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक सुधार 1935 का गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट था। इस अधिनियम ने प्रांतीय स्वायत्तता, संघीय ढाँचा, संघीय न्यायालय, लोक सेवा आयोग और रिजर्व बैंक जैसी संस्थाओं की नींव रखी। भारतीय संविधान के कई प्रमुख प्रावधान—जैसे संघीय संरचना, आपातकालीन प्रावधान और प्रशासनिक व्यवस्था—इसी अधिनियम से गहराई से प्रभावित हैं।

संविधान सभा की मांग और स्वतंत्रता संग्राम का प्रभाव

स्वतंत्र संविधान की मांग स्वतंत्रता आंदोलन के साथ जुड़ी हुई थी। 1934 में क्रांतिकारी मानवेंद्र नाथ रॉय ने सबसे पहले संविधान सभा के विचार का प्रस्ताव रखा। 1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने औपचारिक रूप से इसकी मांग की। 1938 में जवाहरलाल नेहरू ने स्पष्ट घोषणा की कि स्वतंत्र भारत का संविधान वयस्क मताधिकार पर आधारित संविधान सभा द्वारा बिना बाहरी हस्तक्षेप के बनाया जाना चाहिए।

1940 के अगस्त ऑफर में ब्रिटिश सरकार ने सिद्धांततः इस मांग को स्वीकार किया। 1942 के क्रिप्स मिशन ने युद्ध के बाद संविधान बनाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन मुस्लिम लीग ने इसे अस्वीकार कर दिया क्योंकि वह दो अलग संविधान सभाएँ चाहती थी। अंततः 1946 के कैबिनेट मिशन प्लान ने संविधान सभा के गठन का ठोस रास्ता खोला।

संविधान सभा का गठन और प्रारंभिक कार्य

कैबिनेट मिशन प्लान के तहत नवंबर 1946 में संविधान सभा का गठन हुआ। शुरू में इसमें 389 सदस्य थे—296 ब्रिटिश भारत से और 93 रियासतों से। प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव हुए। विभाजन के बाद सदस्य संख्या घटकर 299 रह गई।

9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक नई दिल्ली के संविधान हॉल में हुई। सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष बने। 11 दिसंबर को डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए। 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने ऐतिहासिक उद्देश्य प्रस्ताव (Objectives Resolution) प्रस्तुत किया। इसमें भारत को स्वतंत्र संप्रभु गणराज्य घोषित करने और संविधान के मूल सिद्धांतों—न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व—की स्पष्ट रूपरेखा दी गई। यह प्रस्ताव 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से पारित हुआ और बाद में संविधान की प्रस्तावना का आधार बना।

स्वतंत्रता, प्रारूप समिति और मसौदा तैयार करना

15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत संविधान सभा को पूर्ण संप्रभुता प्राप्त हुई। 29 अगस्त 1947 को प्रारूप समिति (Drafting Committee) का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर बनाए गए। अन्य सदस्य थे—एन. गोपालस्वामी अय्यंगर, अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर, के.एम. मुंशी, सैयद मोहम्मद सादुल्ला, बी.एल. मित्तर (बाद में एन. माधव राव) और डी.पी. खैतान (बाद में टी.टी. कृष्णमाचारी)।

संवैधानिक सलाहकार बी.एन. राव ने विभिन्न देशों के संविधानों का गहन अध्ययन कर प्रारंभिक मसौदा तैयार किया। प्रारूप समिति ने इस पर विस्तार से चर्चा की और फरवरी 1948 में 315 अनुच्छेदों तथा 8 अनुसूचियों वाला मसौदा प्रस्तुत किया।
संविधान सभा में बहस और संविधान को अपनाना

4 नवंबर 1948 को डॉ. अंबेडकर ने संविधान सभा के समक्ष मसौदा पेश किया। इसके बाद खंड-दर-खंड विस्तृत बहस शुरू हुई। कुल 11 सत्र हुए और लगभग 165–166 दिनों की बैठकें चलीं। लगभग 7,635 संशोधन प्रस्तावित हुए, जिनमें से करीब 2,400 पर गंभीर चर्चा हुई। मौलिक अधिकार, निर्देशक सिद्धांत, संघीय ढाँचा, अल्पसंख्यकों के अधिकार और भाषा जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अंतिम रूप से अपनाया। प्रस्तावना सहित मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थीं। 24 जनवरी 1950 को सदस्यों ने अंतिम प्रतियों पर हस्ताक्षर किए। उसी दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत का पहला राष्ट्रपति चुना गया।

संविधान का लागू होना और ऐतिहासिक महत्व

26 जनवरी 1950 को संविधान पूरी तरह लागू हुआ। इसी दिन भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बना। 26 जनवरी का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि 1930 में इसी दिन पूर्ण स्वराज दिवस मनाया गया था। संविधान निर्माण में कुल 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे तथा लगभग 64 लाख रुपये का खर्च आया।

यह संविधान ब्रिटिश, अमेरिकी, आयरिश, कनाडाई, ऑस्ट्रेलियाई और अन्य कई संविधानों से प्रेरणा लेकर बनाया गया, लेकिन भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल ढाला गया। डॉ. अंबेडकर को “भारतीय संविधान का जनक” कहा जाता है, लेकिन यह पूरी संविधान सभा के सामूहिक और लोकतांत्रिक प्रयास का परिणाम था।

आज भी भारतीय संविधान न केवल शासन का आधार है, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और लोकतंत्र की रक्षा का मजबूत स्तंभ है। इसकी लचीली लेकिन मजबूत संरचना ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में स्थापित किया है। 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाते हुए हम इस ऐतिहासिक यात्रा को याद करते हैं और इसके मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं।
Sources:
Constitution of India – Stages of Constitution Making
The Hindu – How India’s Constitution was framed
StudyIQ – Constitution of India History

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